सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रफ़ाल की क़ीमत, सरकार बोली नहीं दे सकते
चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ़ की बेंच ने बुधवार को रफ़ाल मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की.
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा और प्रशांत भूषण की ओर से रफ़ाल मामले में एफ़आईआर दर्ज करने और जांच की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है. इनका आरोप है कि फ़्रांस से रफ़ाल लड़ाकू विमानों की ख़रीद में केंद्र की मोदी सरकार अनियमितता बरती है.
इस सुनवाई में आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह की ओर से दायर याचिका को भी शामिल किया गया.
10 अक्टूबर को अधिवक्ता एमएल शर्मा और विनीत ढांढा की ओर से दायर याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए अदालत ने सरकार से रफ़ाल सौदे के बारे में जानकारी मांगी थी.
भारत और फ़्रांस के बीच 36 लड़ाकू विमानों का सौदा हुआ है. डसॉ कंपनी के बनाए रफ़ाल लड़ाकू विमानों के इस सौदे के बारे में बहुत सी जानकारियां सार्वजनिक नहीं हुई हैं.
विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने विमान सौदे में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. भारत के उद्योगपति अनिल अंबानी की नई-नवेली रक्षा कंपनी के साथ डसॉ के क़रार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
इन्हीं मुद्दों को उठाते हुए कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं.
बुधवार को हुई सुनवाई को हम बताते हुए अरुणअ शौरी ने बीबीसी को बताया, "पहले सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ़ रफ़ाल सौदे की प्रक्रिया पर जानकारी मांगी थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने अपनी जांच को बहुत व्यापक कर दिया है.''
उन्होंने कहा, ''अब सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारियां मांगने के अलावा सरकार से ये भी पूछा है कि विमान की क़ीमत कैसे तय की गई और ऑफ़शोर पार्टनर को सौदे में कैसे शामिल किया गया."
अरुण शौरी ने कहा, "जब भारत के महाधिवक्ता ने सरकार की ओर से कहा क़ीमतें गुप्त हैं तो अदालत ने कहा कि सरकार अदालत से ये बात शपथपत्र पर कहे."
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा और प्रशांत भूषण की ओर से रफ़ाल मामले में एफ़आईआर दर्ज करने और जांच की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है. इनका आरोप है कि फ़्रांस से रफ़ाल लड़ाकू विमानों की ख़रीद में केंद्र की मोदी सरकार अनियमितता बरती है.
इस सुनवाई में आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह की ओर से दायर याचिका को भी शामिल किया गया.
10 अक्टूबर को अधिवक्ता एमएल शर्मा और विनीत ढांढा की ओर से दायर याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए अदालत ने सरकार से रफ़ाल सौदे के बारे में जानकारी मांगी थी.
भारत और फ़्रांस के बीच 36 लड़ाकू विमानों का सौदा हुआ है. डसॉ कंपनी के बनाए रफ़ाल लड़ाकू विमानों के इस सौदे के बारे में बहुत सी जानकारियां सार्वजनिक नहीं हुई हैं.
विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने विमान सौदे में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. भारत के उद्योगपति अनिल अंबानी की नई-नवेली रक्षा कंपनी के साथ डसॉ के क़रार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
इन्हीं मुद्दों को उठाते हुए कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं.
बुधवार को हुई सुनवाई को हम बताते हुए अरुणअ शौरी ने बीबीसी को बताया, "पहले सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ़ रफ़ाल सौदे की प्रक्रिया पर जानकारी मांगी थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने अपनी जांच को बहुत व्यापक कर दिया है.''
उन्होंने कहा, ''अब सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारियां मांगने के अलावा सरकार से ये भी पूछा है कि विमान की क़ीमत कैसे तय की गई और ऑफ़शोर पार्टनर को सौदे में कैसे शामिल किया गया."
अरुण शौरी ने कहा, "जब भारत के महाधिवक्ता ने सरकार की ओर से कहा क़ीमतें गुप्त हैं तो अदालत ने कहा कि सरकार अदालत से ये बात शपथपत्र पर कहे."
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